आज की ताजा खबर

बलिदानियों ने अंग्रेजों के सामने साहसिक जंग लड़ देश के लिए अपने प्राण किए न्योछावर-त्रिभुवन जायसवाल

top-news

वंदे मातरम के विरोधियों से स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान की उम्मीद बेमानी : डा. बच्चा पाण्डेय

आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम बना था स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और साहस का प्रतीक

‎23 अगस्त 1942 को 11 सेनानियों ने दिया था बलिदान, स्मारक को राष्ट्रीय फलक पर सम्मान दिलाने का संकल्प

सेवरही कुशीनगर। स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम के उद्घोष ने देशवासियों में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का जज्बा पैदा किया। मां भारती के सपूतों ने इसके उद्घोष के साथ अंग्रेजी शासन को देश से उखाड़ फेंकने का साहसिक और ऐतिहासिक कार्य किया।

रविवार देर शाम सेवरही स्थित बलिदानी स्मारक पर दीपांजलि कार्यक्रम के बाद संबोधित करते हुए कार्यक्रम संयोजक व भाजपा के क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी डा. बच्चा पांडेय नवीन ने कहा कि देश की आजादी के आठ दशक बाद भी कांग्रेस समेत विपक्षी दल राजनीतिक तुष्टिकरण के कारण वंदे मातरम के संपूर्ण गायन को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में वंदे मातरम का विरोध करने वालों से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और लोकतंत्र के सम्मान की उम्मीद करना बेमानी है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 अगस्त 1942 को सेवरही में 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बलिदान दिया था। इन बलिदानियों और बलिदानी स्मारक को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार हैं। प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को दीपांजलि कार्यक्रम आयोजित करने के पीछे उनका संकल्प इन बलिदानियों को राष्ट्रीय फलक पर सम्मान दिलाना है।

पूर्व विधायक नंदकिशोर मिश्र ने कहा कि सेवरही की धरती ने आजादी की लड़ाई में जो बलिदान दिया, वह सदैव स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा। बलिदानियों की दिखाई राह हमें राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देती है। चेयरमैन प्रतिनिधि त्रिभुवन प्रसाद जायसवाल ने कहा कि सेवरही के बलिदानियों ने अंग्रेजों के सामने साहसिक जंग लड़ी और देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।

नगर पंचायत स्मारक और इस गौरवशाली परंपरा के संरक्षण को हमेशा प्राथमिकता देगी। पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमचंद मिश्र ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान किसी एक दल, वर्ग या क्षेत्र की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की अमूल्य विरासत है। नई पीढ़ी को उनके संघर्ष और त्याग से परिचित कराना तथा बलिदानी स्मारकों को उचित सम्मान दिलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि देशभक्ति के प्रतीकों और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को राजनीतिक संकीर्णता से ऊपर रखकर सम्मान देना चाहिए। अध्यक्षता चेयरमैन सोनिया जायसवाल ने की। कार्यक्रम को भाजपा के जिलामंत्री धनंजय राय, राधेश्याम पांडेय ने भी संबोधित किया।

इस दौरान बृजभूषण मिश्र उर्फ बड़का बाबू, रमेश ब्याहुत, हीरालाल सोनी, विजय तुलस्यान, विजय देवड़ा, पप्पू जायसवाल, दीपक जायसवाल, संतोष वर्मा, बैजनाथ वर्मा, सुभाष यादव, लव जायसवाल, फारुख अंसारी, राधे बाबू रौनियार, मक्खन जायसवाल, सुशील सिंह, निर्मल अग्रवाल, मोती जायसवाल, रामनरेश मिश्रा, सोनिया वर्मा आदि मौजूद रहे।

https://lokbharti.co.in/ad/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *